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परन्तु परमेश्वर से सब कुछ हो सकता है।


मत्ती 19:26
[26] यीशु ने उन की ओर देखकर कहा, मनुष्यों से तो यह नहीं हो सकता, परन्तु परमेश्वर से सब कुछ हो सकता है।
मत्ती 19:26 — “परमेश्वर से सब कुछ हो सकता है”

बाइबल का यह वचन—“मनुष्यों से तो यह नहीं हो सकता, परन्तु परमेश्वर से सब कुछ हो सकता है”—हमारी आत्मिक यात्रा में अत्यंत गहरा और जीवन को बदल देने वाला सत्य प्रकट करता है। यह वचन यीशु के उन शब्दों में से है जो हर परिस्थिति में हमारी आशा, हिम्मत और विश्वास को मज़बूत करते हैं।

यह पद हमें याद दिलाता है कि हमारे जीवन में चाहे कितनी ही बड़ी परिस्थिति क्यों न आ जाए, परमेश्वर के लिए कोई भी बात असंभव नहीं है।


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1. मनुष्य की सीमाएँ – परमेश्वर की असीम शक्ति

हम मनुष्य अपनी बुद्धि, ताकत, अनुभव और साधनों के आधार पर सीमित हैं।
कई बार हम ऐसी स्थितियों का सामना करते हैं जहाँ लगता है कि अब कोई रास्ता नहीं बचा—

संबंधों में टूटन

बीमारी

आर्थिक तंगी

नौकरी या परिवार की समस्या

मन का टूटना, निराशा


इन सबमें हमें लगता है—“अब कुछ नहीं हो सकता।”

लेकिन यीशु कहते हैं—“मनुष्यों से तो यह नहीं हो सकता…”
यानी हमारी ताकत एक सीमा तक ही काम कर सकती है।


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2. परमेश्वर के लिए सब कुछ संभव है

यही वचन आगे कहता है—
“…परन्तु परमेश्वर से सब कुछ हो सकता है।”

परमेश्वर की शक्ति ऊपर से आती है, वह मनुष्यों की सीमाओं में बंधा नहीं है।
वह—

असम्भव को सम्भव करता है

बंद दरवाज़े खोलता है

रास्ते तैयार करता है

टूटे मन को चंगा करता है

कमजोर को बल देता है

दुखी को आशा देता है


बाइबल में हर कहानी इस सत्य की गवाही देती है—

समुद्र लाल सागर दो हिस्सों में बंट गया

दाऊद ने गोलियत को हराया

सूखी हड्डियाँ जीवित हो गईं

अंधे ने दृष्टि पाई

मरे हुए जीवित हुए


सिद्धांत स्पष्ट है: परमेश्वर के लिए कुछ भी कठिन नहीं।


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3. जब रास्ता न दिखे, तब विश्वास सक्रिय होता है

अक्सर परमेश्वर की शक्ति तब प्रकट होने लगती है जब हमारे अपने प्रयास समाप्त हो जाते हैं।
जब हम कहने लगते हैं:
“प्रभु, मैं नहीं कर पा रहा… अब तू कर।”

वही क्षण विश्वास का क्षण है।
वही क्षण चमत्कार का प्रारम्भ होता है।

परमेश्वर चाहता है कि हम अपनी समझ पर नहीं, उसकी शक्ति पर भरोसा रखें।


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4. आज के जीवन के लिए यह वचन क्या कहता है?

✔ जब बीमारी असम्भव लगे—परमेश्वर से चंगा होना सम्भव है।

✔ जब रिश्ते टूट जाएँ—परमेश्वर उन्हें फिर से जोड़ सकता है।

✔ जब सपने अधूरे लगें—परमेश्वर आपके लिए नई राहें खोल सकता है।

✔ जब दरवाज़े बंद हों—परमेश्वर नया दरवाज़ा खोल देता है।

✔ जब आप टूट जाएँ—वह आपको उठाता है और नई ताकत देता है।

हमारा काम है विश्वास रखना, और परमेश्वर का काम है चमत्कार करना।


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5. परमेश्वर से सब कुछ सम्भव है — यह सिर्फ वचन नहीं, अनुभव भी है

हर विश्वास करने वाले ने अपने जीवन में परमेश्वर की सामर्थ को किसी-न-किसी रूप में अनुभव किया है।
वह—

सही समय पर मदद भेजता है

आपके लिए लोगों के हृदय बदल देता है

आपको ऐसी जगह पहुंचा देता है जहाँ आप अकेले कभी नहीं पहुँच सकते थे


परमेश्वर हमेशा कार्य करता है, पर अक्सर हमें दिखाई नहीं देता।
लेकिन विश्वास का अर्थ है—देखने से पहले भरोसा करना।


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6. निष्कर्ष — इस वचन को अपने जीवन पर लगाएँ

आज इस वचन को अपने जीवन के हर भाग पर लागू करें।
जहाँ भी आप संघर्ष कर रहे हैं, वहाँ यह घोषित करें:

“मेरे लिए नहीं, पर मेरे परमेश्वर के लिए सब कुछ सम्भव है।”

जब आप विश्वास के साथ यह वचन पकड़ेंगे, तब परमेश्वर आपके असम्भव को सम्भव में बदलना शुरू कर देगा।


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अंत में एक छोटा प्रार्थना-संदेश

“हे प्रभु, जहाँ मैं असमर्थ हूँ, वहाँ तू समर्थ है।
मेरे जीवन में जो बातें असम्भव लगती हैं, उनमें अपनी सामर्थ प्रकट कर।
मेरे विश्वास को मज़बूत कर और मुझे तेरी इच्छा में चलने की बुद्धि दे।
 Amen 

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